Monday, 6 October 2025

💫 वो अपना सा 💫

कोई तुमसे पूछे — कौन हूँ मैं,

कह देना — दोस्त हूँ, सच्चा सा, अपना सा। 🤝


खड़ा रहता है ढाल बनकर,

हर मुश्किल में — बिना कहे, तेरे सिर का दर्द बनकर। 😄


हँसते-रोते हर जज़्बात में,

साथ देता है — आधी रात में भी बात में। 🌙


कोई साथ न दे, हर रिश्ता निभाता है,

खुश रखता है — दुखों में भी मुस्कान लाता है। 😊


जैसा भी वक्त आए —

कभी बाप, कभी माँ, कभी यार,

कभी झगड़ू बनकर भी करता है प्यार। ❤️


यादों में बसा हर प्यारा पल,

सुख-दुख में साथी, कभी अलग नहीं।

वो मेरी बगिया का फूलों का —

गुच्छा है, अच्छा है, सच्चा अपना सा। 🌸


कभी लड़ाई भी हो, तो भी दिल न टूटे,

हर हँसी, हर आँसू, हर पल —

सच्चा, अपना सा, भरोसे का साथ न छूटे। 💫


मेरा नहीं है वो,

पर हर मुश्किल में किनारा है, सहारा है,

लगता है — उसी से हौसला है,

मुस्कान है मेरी, मेरे आसमान का तारा है। 🌟


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