खुद को खड़ा रखने के लिए…
साँसें भी यूँ ही नहीं चलती,
दिल को कई बार धड़कना पड़ता है…
कई फैसले गलत साबित होते हैं,
तो कई फैसलों को स्वीकार करना पड़ता है…
मुश्किलें भी आसानी से हल नहीं होतीं,
कभी वक़्त को, तो कभी खुद को बदलना पड़ता है…
हर चाहत मुकम्मल हो ये ज़रूरी तो नहीं,
कुछ ख़्वाबों को अधूरा छोड़ना पड़ता है…
ज़िंदगी सिर्फ़ खुशियों का सफ़र नहीं होती,
यहाँ दर्द के साथ भी मुस्कुराना पड़ता है…
कभी अपने भी समझ नहीं पाते,
और कभी गैरों में सहारा मिल जाता है…
जो भीतर से टूट चुका होता है,
अक्सर वही सबसे ज्यादा संभलना सिखा जाता है…
ये ज़िंदगी हर रोज़ इम्तिहान लेती है,
और हर इम्तिहान कुछ नया सिखा जाता है…
जो दर्द को भी ताक़त बना ले,
वही इंसान वक़्त से आगे निकल जाता है…
इतने सारे दर्द भरे पड़े हैं दिल में,
एक को खत्म करने के लिए नया दर्द जगाना पड़ता है…
मुसीबतें खत्म ही नहीं होती ज़िंदगी से,
हर रोज़ खुद को फिर से समझाना पड़ता है…
कभी अपनों की बातें चुभ जाती हैं,
तो कभी ख़ामोशियाँ रुला जाती हैं…
जो चेहरे हँसते हुए दिखते हैं बाहर से,
अक्सर अंदर से वही सबसे ज्यादा टूटे होते हैं…
ज़िंदगी शायद आसान किसी के लिए नहीं होती,
हर किसी को अपने हिस्से का दर्द उठाना पड़ता है…
और कई बार जीने के लिए भी,
खुद से ही लड़ते चले जाना पड़ता है…
थक कर बैठ जाने का मन भी करता है,
मगर जिम्मेदारियाँ सोने कहाँ देती हैं…
कुछ रिश्ते अंदर ही अंदर मर जाते हैं,
पर उनकी यादें रोने कहाँ देती हैं…
वक़्त धीरे-धीरे सब बदल देता है,
इंसान की चाहतें, आदतें, और भरोसे भी…
जो कल तक जान हुआ करते थे,
आज वही अजनबी से लगते हैं कभी-कभी…
फिर भी ना जाने क्यों उम्मीद बची रहती है,
कि शायद एक दिन सब ठीक हो जाएगा…
ये दिल लाख टूट जाए मगर,
फिर भी किसी अपने का इंतज़ार करता रह जाएगा…
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