Thursday, 28 May 2026

हालात बदलते हैं… लोग नहीं बदलने चाहिए

कभी कभी बहुत मन भर आता है,
किसी अपने से बात करने का खयाल आता है…
फिर बहुत देर तक खुद से लड़कर,
काँपते हाथों से वही नंबर मिलाया जाता है…

सोचते हैं शायद इस बार
कुछ अपनापन सुनने को मिल जाएगा,
जो बरसों साथ चलने का दावा था,
उसमें से थोड़ा सा साथ मिल जाएगा…

पर बातों बातों में फिर समझ आता है,
मुझे ही हर बार आज़माया जाता है…
इतनी लंबी मोहब्बत का,
जुर्माना बस मुझपे लगाया जाता है…

मन तो हल्का होता नहीं,
दिल फिर से भारी हो जाता है…
जिसे अपना घर समझकर उम्र दे दी,
उसी के सामने खुद को पराया पाया जाता है…

उन्हें लगता है वो मेरा घर बर्बाद कर रहे हैं,
पर ये खयाल उन्हें बरसों पहले नहीं आता है…
अब तो सारी हदों की सरहदें टूट गई हैं,
समझ जाओ जन्म-जन्मान्तर तक का नाता है…

जब मैं रिश्तों को जोड़ने में लगा था,
तब तुम्हें हालातों का ख्याल नहीं आया…

मैंने हर टूटती चीज़ को संभाला,
हर रिश्ते को सीने से लगाया…
अपने हिस्से की नींदें बेचकर भी,
तुम्हारे हर सपने को अपना बनाया…

मैंने तो हर रिश्ते में खुद को ढाला है,
अपने आप को तुम्हारे जैसा बनाया है…

कभी कभी उनके लिए भी जीना चाहिए,
जो आज भी तुमपे मरते हैं…
तुम्हें ही अपना समझते हैं,
और तुमसे ही बेइंतहा प्यार करते हैं…

जो तुम्हारी खामोशी में भी
तुम्हारा दर्द पढ़ लिया करते हैं,
जो अपने हिस्से की खुशियाँ छोड़कर
सिर्फ तुम्हारे लिए जिया करते हैं…

पर उन्हें तो बस अपना ही सोच प्यारा है,
किसी रिश्ते को बचाने की खातिर
खुद का बदलना भी गंवारा नहीं है…

मानता हूँ हालात बदलते हैं,
पर इन सब में हम क्यों बदल जाते हैं…
जहाँ से शुरू किया था सफ़र,
वैसे फिर क्यों नहीं रह पाते हैं…

वक्त का काम तो बस
रास्तों को बदलना होता है,
पर इंसान अक्सर
अपना दिल ही बदल जाता है…

जो हाथ कभी सुकून देते थे,
वो धीरे धीरे छूटने लगते हैं…
जो रिश्ते रूह से जुड़े होते हैं,
वो भी वक़्त के साथ टूटने लगते हैं…

हालातों को उसके हाल पर छोड़ देना चाहिए,
हमें अपना साथ निभाना चाहिए…
जो रिश्ता भगवान ने हमारे हिस्से लिखा है,
बस उसे पूरी ईमानदारी से निभाना चाहिए…

हर बात में जीत ज़रूरी तो नहीं होती,
कभी रिश्तों के लिए हारना भी पड़ता है…
किसी अपने को अपना बनाए रखने के लिए,
कभी खुद को थोड़ा बदलना भी पड़ता है…

मोहब्बत सिर्फ़ अच्छे दिनों का नाम नहीं,
बुरे वक्त में भी साथ निभाना पड़ता है…
वरना आसान तो बहुत है छोड़ जाना,
मगर रिश्ता निभाने के लिए
दिल से दिल तक आना पड़ता है…

जो लोग हर हाल में साथ खड़े रहते हैं,
असल में वही अपने कहलाते हैं…
बाकी तो हालात बदलते ही,
धीरे धीरे बदल जाते हैं…

और सबसे ज्यादा दर्द तब होता है,
जब रिश्ता टूटता नहीं…
बस पहले जैसा नहीं रह जाता है…॥

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