Thursday, 11 September 2025

"ट्रैफिक जाम"

ट्रैफिक जाम,

हर तबका हर इंसा परेशान,

ये रोज रोज का काम,

नहीं मिलता बिल्कुल भी आराम ।


हर चौराहा रेड लाइट,

स्थिति बहुत है टाइट,

हौसला है थका,

सिर्फ उम्मीदों पर टीका ।


बेवजह का शोर,

नहीं चलता अपना जोर,

कोशिश आगे निकलने की,

एक दूसरे को पीछे छोड़ने की ।


तब कान फूट जाते हैं

जब सारे हॉर्न बज जाते हैं

कईं इंजन शोर मचाते हैं

प्रदूषण का इंडेक्स बढ़ाते हैं ।


अस्पतालों के बेड भर रहें

करोड़ों लोग पीड़ित बन रहे,

कईं सांस नहीं ले पा रहे,

बाकी अपने फेफड़े में धूल जमा रहे ।


बेवजह का चक्काजाम,

दुकानदार फैला रहा सड़क पर दुकान,

कोई अपनी हद पार कर रहा,

उधर एम्बुलेंस में लेटा भगवान को याद कर रहा ।


सिपाही सिटी बजा रहा,

जैसे कानों में म्यूजिक सुना रहा,

इंस्पेक्टर चलान बना रहा,

आम आदमी अपनी जेब से चुका रहा ।


सड़क पर ठेलों का राज,

भीड़ में खड़े जोर जोर से देते आवाज,

एक दिन सब सुधर जाएगा,

क्या मालूम वो दिन कब आएगा ।


क्यों नहीं अपनाते पब्लिक ट्रांसपोर्ट,

नहीं जाना पड़ेगा चालान चुकाने कोर्ट,

सड़कों को भी थोड़ी सांस आएगी,

सबकी 2- 4 साल जिंदगी बढ़ जाएगी ।


अब नई पीढ़ी आयेगी,

साफ़ हवा संग मुस्कुराएगी,

हर बच्चा होगा तंदरुस्त,

युवा रहेंगे मन और शरीर होगा स्वस्थ ।


हर सड़क पर हरियाली होगी,

न धुआं, न कचरे की ढेरी होगी,

साफ़ हवा का तोहफ़ा पाएंगे,

पक्षियों की चहचहाहट फिर से लौटाएंगे ।


ना हॉर्न का शोर, ना जाम की मार,

साइकिल और पैदल चलना होगा अपार,

पब्लिक ट्रांसपोर्ट बनेगी पहचान,

कम होगा प्रदूषण, शहर का बढ़ेगा सम्मान।


जब सांसें होंगी हल्की और साफ़,

दिल भी रहेगा मजबूत और ख़ास,

नई सुबह एक वादा लाएगी,

अबकी पीढ़ी मुस्कुराती जाएगी। 


भाई कहां खो गया,

तब इस जाम से भी मुक्ति मिल जाएगी ।

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