🌸 मैं अकेली नहीं हूं 🌸
गिरती हूं, सीखती हूं, समझती हूं,
देर से ही सही, अपने मुकाम तक पहुंचती हूं।
गिर भी जाऊं तो खुद ही उठ खड़ी हो जाऊंगी,
अपने जज़्बे से हर बार नई राह बनाऊंगी।
नहीं चाहिए मुझे किसी का सहारा,
जिसे अपना समझा, वही निकला दुश्मन हमारा।
चाहे लाख कठिनाइयाँ राह में आएं,
सबसे लड़कर मैं आगे बढ़ जाऊंगी।
लिए होंगे कुछ फैसले गलत
राह चुनी होगी सबसे अलग
मुझे अब नहीं पछताना है
अपना खोया अस्तित्व फिर पाना है ।
कमज़ोर मत समझना मुझे मेरे स्त्री होने से,
मैं दुर्गा हूं, में शक्ति हूं, अपना अस्तित्व खुद गढ़ जाऊंगी।
सिंचा है खून से जिन रिश्तों को,
उसी ने विश्वास तोड़ा है ।
आँसुओं से मैंने हिम्मत को बुन लिया,
मज़बूत होकर नया युद्ध पथ चुन लिया।
अभी भी लोग मुझे दबाते हैं,
मुझे सबसे कमजोर आँकते हैं।
मगर मुझे मेरी हद याद है,
जिम्मेदारी का भी पूरा एहसास है।
पर मुझे तो आगे बढ़ना है,
अब किसी से नहीं डरना है।
अब कोई रोक नहीं पाएगा मेरी उड़ान,
मेरे अपने पर होंगे और मेरा अपना आसमान।
जुनून मेरी पहचान बनेगा,
हर जीत मेरी कहानी कहेगा।
मैं अकेली नहीं,
मेरा साहस मेरे साथ है,
मेरी मेहनत ही मेरी सबसे बड़ी बात है।
सबका गुरूर मैं अब तोड़ दूंगी,
अपने संकल्प से नई दुनिया गढ़ लूंगी ।
में स्त्री हूं, वीरों ने मेरा दुग्धपान किया है,
मैने ही लक्ष्मीबाई बन कर भयाक्रांत किया है ।
जब बात स्वाभिमान पर आती है
स्त्री सारी हद तोड़ जाती है
जो सोच ना सका एक पुरुष
वो सारे काम स्त्री कर जाती है ।
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