Monday, 19 October 2026
रिश्ते की केमेस्ट्री
❤️ एक रिश्ता ❤️
❤️ ये दिल क्या चाहे… ❤️
Thursday, 8 October 2026
जा छोड़ा साथ तुम्हारा
Wednesday, 7 October 2026
मोती और संगत
Friday, 2 October 2026
कुदरत को समझना है
जहां से चला था
गाँवों से शहर पहुँचने की,
कल तक गाँव छोड़कर भागे थे,
जल्दी थी शहर में बसने की।
पीछे छूट गया था आँगन,
तुलसी चौरा, कच्ची दीवारें,
दादी की वो धीमी लोरी,
माँ की आवाज़ें प्यारी-प्यारी।
वो कुएँ की ठंडी छाया,
वो पीपल के नीचे चौपाल,
गोधूलि में लौटते मवेशी,
और धूल भरी वो पगडंडी बेहाल।
बरसात में कागज़ की नावें,
सर्दी में अलाव का साथ,
गर्मियों की वो छत पर नींदें,
तारों से होती अपनी बात।
खेतों में पकती गेहूँ की बालें,
सरसों का पीला-पीला रंग,
बैलगाड़ी की धीमी चाल में
बसता था अपना सारा संसार।
त्योहारों पर घर भर जाता,
दूर के अपने पास आते थे,
थोड़े साधन, बड़े दिल लेकर
हम मिलकर खुशियाँ मनाते थे।
फिर शहर ने बाँहें फैलायीं,
हम भी सपनों संग चल दिए,
रोटी, रिश्ते, नींद—न जाने
कितने मौसम वहीं ढल दिए।
अब थककर जब लौट रहे हैं,
तो समझ में आया यह राज़—
शहर ने जीवन तो दे डाला,
गाँव ने दिया था जीने का अंदाज़।
जिस आँगन को छोटा समझकर
हम दुनिया देखने निकल गए,
आज उसी की मुट्ठी भर मिट्टी को
आँखों से लगाकर लौट रहे।
देखो, जीवन कितना गोल है—
जहाँ से चला, वहीं आ रहा,
जिसे पीछे छोड़ गया था इंसान,
आज वही उसे अपना बुला रहा।
शायद लौटना पीछे जाना नहीं,
अपनी जड़ों को फिर से पहचानना है।
इंसान चाहे जहाँ तक पहुँच जाए,
अंततः उसे अपने गाँव में ही
अपना बचपन मिलना है।
Thursday, 1 October 2026
कुदरत के रंग
दिल की एक बात
Thursday, 24 September 2026
मेरे मैं का विसर्जन
आज मैंने मेरे ‘मैं’ का विसर्जन कर लिया,
कुछ यादों और अनुभवों का सृजन कर लिया।
कुछ आदतों, कुछ लोगों का तर्पण कर लिया,
कुछ शब्दों और रिश्तों का विसर्जन कर लिया।
जो मेरा था ही नहीं, उसका त्याग कर लिया,
जो मेरा अपना था, उसका वरण कर लिया।
कर रखा था कई जगह मैंने अपना समर्पण,
आज सबसे अपना थोड़ा-सा आहरण कर लिया।
बहुत खो चुका था खुद को औरों को निभाते हुए,
आज अपने अस्तित्व का पुनः सृजन कर लिया।
न कोई शिकायत रखी, न कोई अपेक्षा रखी,
आज अपने मन का स्वयं ही शुद्धिकरण कर लिया।
अब किसी की स्वीकृति की चाह नहीं रही,
अपने होने को ही अपना प्रमाण कर लिया।
जो बीत गया, उसे बीते कल में छोड़ दिया,
आज अपने आने वाले कल का वरण कर लिया।
आज मैंने मेरे ‘मैं’ का विसर्जन कर लिया,
और उसी विसर्जन में अपना पुनर्जन्म कर लिया।