तो सुन लेना कुछ बात मेरी,
में हर किसी से सब कुछ कहता नहीं,
अगर में आगे बढ़ूँ,
तो पकड़ लेना हाथ मेरा,
में हर किसी के साथ जुड़ता नहीं।
अगर में तुम्हारे साथ चलूँ,
तो चल देना साथ मेरे,
में हर किसी के साथ कदम बढ़ाता नहीं।
अगर में खामोश रहूँ,
तो समझ लेना हाल मेरा,
में हर किसी को अपना दर्द बताता नहीं।
अगर में मुस्कुरा दूँ,
तो पहचान लेना वजह मेरी,
में हर किसी के लिए यूँ हँसता नहीं।
अगर में ठहर जाऊँ कहीं,
तो जगह दे देना पास अपने,
में हर किसी के पास यूँ ठहर जाता नहीं।
अगर में नज़रें मिलाऊँ,
तो पढ़ लेना आँखों की बात,
में हर किसी से यूँ नज़रें मिलाता नहीं।
अगर में वक्त दूँ तुझे,
तो समझ लेना अहमियत मेरी,
में हर किसी के लिए यूँ वक्त बनता नहीं।
अगर में नाम लूँ तेरा,
तो महसूस करना अपनापन,
में हर किसी को यूँ यादों में लाता नहीं।
अगर में रूठ जाऊँ कभी,
तो मना लेना मुझे,
में हर किसी से यूँ उलझता नहीं।
अगर में मना लूँ तुझे तो
मान लेना प्यार मेरा,
में हर किसी को यूँ मनाता नहीं।
अगर में साथ निभाऊँ तो
यकीन करना मेरे इरादों पर,
में हर किसी के लिए यूँ ठहरता नहीं।
अगर में तुझे चुन लूँ तो
समझ लेना फैसला मेरा,
में हर किसी को यूँ चुनता नहीं।
अगर में तेरा हो जाऊँ तो
संभाल लेना साथ मेरा,
में हर किसी का यूँ होता नहीं।
अगर में आख़िर तक तेरा रहूँ तो
यकीन करना इस बात पर,
ईश्वर ऐसे रिश्ते हर किसी को देता नहीं।
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