पहाड़ों का गहरा मौन,
नदियों का कलकल शोर समझना है।
इन वादियों की खामोशी में,
कुछ अनकहे से बोल समझना है।
सुबह की पहली भोर,
सांझ को पक्षियों का शोर समझना है।
ओस की बूंदों में छुपी खुशी,
हवा का मस्त झकोर समझना है।
इस नीले गगन की असीम ऊँचाई,
तो इस खाई की गहराई समझना है।
बादलों की आवारगी में,
बारिश की सच्ची रुसवाई समझना है।
उगते सूरज की सुर्ख लालिमा,
डूबते सूरज की बासंती परछाई समझना है।
हर ढलती शाम के पीछे,
एक नई सुबह की अंगड़ाई समझना है।
फूलों की महक, तितलियों के रंग,
भौंरों की मधुर तरंग समझना है।
पेड़ों की छाँव में ठहरी राहत,
माटी का अपना उमंग समझना है।
जिंदगी ने जो दिया है हमें,
उसका हर एक हिसाब समझना है।
कुदरत की इस खुली किताब में,
बस जीना नहीं—जीवन का अर्थ समझना है।
इसे लोकभाषा में कन्वर्ट करें ।
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