कभी गुस्से का शो, कभी प्यार का फ्लो,
कभी छोटी-सी बात पर टेंशन और रिएक्शन,
फिर तेरी एक आवाज़ और वही पुराना कनेक्शन।
न तेरे बिन सुकून, न मेरे बिन करार है,
न दूरी बर्दाश्त, न गुस्सा स्वीकार है,
मिलना न हो तो तबीयत बिगड़ जाती है,
तेरी नाराज़गी भी मुझे तड़पाती है।
कई बार सोचा, अब तुझे नहीं मनाऊँगा,
तेरे रूठने पर मैं भी रूठ जाऊँगा,
पर तेरी उदासी देखी नहीं जाती,
हर बार अपनी ही ज़िद से हार जाता हूँ।
न जाने ये मोहब्बत है या कोई मिस्ट्री है,
न पूरी तरह दूरी, न पूरी नज़दीकी है,
तुझसे लड़ने की वजहें हज़ार सही,
पर तुझसे दूर जाने की एक भी वजह नहीं।
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