भगवान ने कैसी सीक्वेंस जमाई,
हार के बाद ही जीत दिखाई ।
पहले होता घोर अंधेरा,
फिर खिलता सुनहरा सवेरा ।
जबान को जब तीखा लग जाता,
फिर सबको मीठे का स्वाद याद आता ।
तलवार के संग ढाल बनाई,
तो सुलह के पहले लड़ाई भी सजाई ।
राह में न जाने कितनी रुकावटें आईं,
हर रुकावट के बाद कुछ राह सुझाई ।
हर खुशी के पहले आँखें हुईं नम,
भूल गए उसके पहले के सारे ग़म ।
पतझड़ के बाद ही बहार आई,
सूखी टहनियों पर कली मुस्कुराई ।
गिरने के बाद ही संभलना सिखाया,
ग़मों के बाद ही खुशियों का रस आया ।
संग संघर्ष के ही मंज़िल सजाई,
भगवान ने कैसी अद्भुत सीक्वेंस बनाई ।
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