Tuesday, 30 September 2025

रिश्तों का अंत

रिश्ते का अंत समझदारी से हो,
ना कोई मलाल हो, ना मन भारी हो।
एक ही जीवन मिला है हमको,
जो भी हो अंत, वो लाभकारी हो।

अंत तो सबका तय होता,
यही तो शुरू से भय होता।
किसी का मिलन आंसुओं से तो,
किस का बिछोह हंसी खुशी होता है।

अब नहीं बन रही है तो छोड़ो,
नव कड़ियों से जीवन जोड़ो।
खत्म करो इस बोझ को,
बदल दो अपनी सोच को ।

वो रास्ते जो ठहर गए हैं,
उन्हें हवा में उड़ जाने दो।
जो दिल में जमी हैं गांठें,
उन्हें खुलकर बिखर जाने दो।

कुछ यादें छोड़ना पड़ेगी,
बची हुई तन्हाई समेटना पड़ेगी।
वक्त अच्छा था समझ ना पाए,
उन रिश्तों को सहेज ना पाए।

मन में कोई बोझ रखना नहीं,
कोई बुरी बातें सहेजना नहीं।
यादें जीवनभर साथ निभाएंगी,
हर सुख-दुख में पास आएंगी।

रिश्तों में भावनाएँ ही होती हैं,
उन्हें आहत होने ना देना।
उस रिश्ते को सुंदर अंत देना,
जीवन को जीने का मंत्र देना।

रिश्ते का अंत समझदारी से हो,
ना कोई मलाल हो, ना मन भारी हो।
एक ही जीवन मिला है हमको,
जो भी हो अंत, वो लाभकारी हो।

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