मगर तुम्हारा ये अंदाज़ हमें रुलाता है।
तुम तो हँसकर गुज़र जाते हो उस पल से,
पर वो पल हमारे दिल में ठहर जाता है।
हमें भी तो हसरत है दो पल तुम्हारे साथ की,
कुछ अनकही बातों की, कुछ मीठी मुलाक़ात की।
तुम्हें लगता है हम भी हँसकर भूल जाएंगे,
पर हमें आदत है हर बात दिल से लगाने की।
तुम जानकर भी क्यों दिल को यूँ सताते हो,
कभी पास बुलाते हो, कभी दूर चले जाते हो।
तुम्हारी ये अदा शायद तुम्हें बहुत प्यारी है,
मगर हम इससे हर बार थोड़ा टूट जाते हैं।
शरारत करो, मगर दिल से खेला न करो,
हमें यूँ चाहत में उलझाकर छोड़ा न करो।
तुम्हें हँसी आती है हमारी घबराहट देखकर,
हमारी धड़कनों को यूँ तमाशा बनाया न करो।
बस इतना समझ लो—तुम्हारी हर बात असर करती है,
तुम्हारी बेरुख़ी भी रातों तक सफ़र करती है।
इसलिए तुम्हारा ये अंदाज़ अब अच्छा नहीं लगता,
तुम्हारी छेड़छाड़ से ज़्यादा, तुम्हारी ख़ामोशी डराती है।
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