कुछ कमी सी लगती है तेरे एहसासों में,
अब वो बात भी नहीं रही तेरी गर्म सांसों में।
पहले तो हँसी पर भी नज़रें ठहर जाती थीं,
अब तेरी मुस्कुराहट भी बनावटी लगती है।
अब तेरी आँखों में वो चमक नहीं रहती,
ना ही उन बातों में पहले जैसी नर्मी रहती।
हम तो आज भी तुझे दिल से चाहते हैं,
पर अब तेरे लहजे में वो बेशर्मी नहीं रहती।
अब शिकवा नहीं, ना कोई गिला बाकी है,
तेरी यादों का बस धुंधला सिलसिला बाकी है।
तू बदल गया तो क्या हुआ, मैं तो वही हूँ,
पर लगता है दिलों में थोड़ा फ़ासला बाकी है।
प्यार रोज़मर्रा की परेशानियों पर बलिदान हो गया,
जो सालों से अपना था वो मेहमान हो गया।
जिन्हें जीते थे अपनी हर सांस में हर पल,
कोशिश तो बहुत की… पर वो एहसास अनजान हो गया।
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