Thursday, 9 October 2025

🌿 जीवन दर्शन 🌿

कई किस्से अभी अधूरे हैं,
पूरी बात बताना अभी बाकी हैं।
ज़िंदगी थोड़ी सी ही गुज़री है,
पर बहुत कुछ जीना अभी बाकी है।

हर मोड़ कुछ सिखा जाता है,
हर ठोकर मंज़िल दिखा जाती है।
रुकने से बेहतर है चलते रहना,
क्योंकि अभी बहुत सा सफ़र बाकी है।

ग़म में भी उजाला ढूँढना सीखो,
ख़ुशी को खुद में पाना बाकी है।
बस दो चार कदम ही चले हैं, 
अभी तो जिंदगी की पूरी दौड़ बाकी है।

भटकने को तो दुनिया पड़ी है,
सही राह चुनना बाकी है।
अभी राह में हमने देखा ही क्या,
अभी तो पूरी कायनात बाकी है।

अभी तो थोड़े से ठहरे हैं हम,
मुकाम पर पहुंचा भी जरूरी है।
अभी तो पंख फैलाए हैं हमने,
ऊँची उड़ान भरना अभी बाकी है।

कुछ अपने गहरे घाव दे गए हैं,
कुछ ज़ख्म खाना बाकी है।
वक़्त अच्छा आ ही जाएगा,
बस थोड़ा मरहम लगाना बाकी है। 

कुछ लोगों ने साथ छोड़ दिया,
कुछ को छोड़ना अभी बाकी है।
कुछ लोग दुश्मन बन गए हमारे,
कुछ चाहने वाले अभी भी बाकी हैं।

कुछ ख्वाब अधूरे हैं अभी,
कुछ पल जीना बाकी हैं।
अभी तो शुरुआत की है लिखने की,
बहुत कुछ लिखना बाकी है ।

🌸

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