Wednesday, 5 November 2025

तुम खत्म, मै खत्म

मिलना ख़त्म — नज़दीकियाँ ख़त्म,
नज़दीकियाँ ख़त्म — एहसास ख़त्म।
एहसास ख़त्म — जज़्बात ख़त्म,
जज़्बात ख़त्म — तो संबंध भी ख़त्म।

बात ख़त्म — बातचीत ख़त्म,
साथ ख़त्म — तो सफ़र भी ख़त्म।
साँस ख़त्म — धड़कन भी ख़त्म,
ग़ुस्सा ख़त्म — तो असर भी ख़त्म।

नज़रें ख़त्म — तो पहचान ख़त्म,
पहचान ख़त्म — तो अरमान ख़त्म।
पल ख़त्म — तो उम्मीद भी ख़त्म,
उम्मीद ख़त्म — तो तामीर भी ख़त्म।

शिकवा ख़त्म — शिकायत ख़त्म,
झगड़ा ख़त्म — तो प्यार भी ख़त्म।
प्यार ख़त्म — तो दुनिया भी ख़त्म,
दुनिया ख़त्म — तेरी यादें ख़त्म।

यादें ख़त्म — तो सुकून भी ख़त्म,
सुकून ख़त्म — तो नींदें भी ख़त्म।
सवाल ख़त्म — तो जवाब भी ख़त्म,
रिश्ता ख़त्म — तो नाते भी ख़त्म।

अब कुछ नहीं बचा कहने को,
दलील खत्म, फ़रियाद खत्म।

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