Saturday, 29 November 2025

उलझनों के रंग

यूं ही उलझा हुआ-सा रहने दे तुझमें,
अभी जीने की तमन्ना बची है थोड़ी।
अगर सुलझ गया तो बिखर जाऊंगा,
तेरे ही अक्स में जिंदा रहने दे मुझे।

मुझे यूं बेफ़िक्रा-सा होना नहीं जमता,
थोड़ा अपने करीब ठहरने दे।
अभी तो तेरे सवाल समझने हैं,
मुझे तेरे जवाबों में ही उलझा रहने दे।

इतने सालों से देखता रहा हूँ तुझको,
और कोई तस्वीर जमती ही नहीं।
एक आईना ही है जो तुझे बना सके,
तू नहीं मिली, उस आईने को ही रखने दे मुझे।

तुझे आज तक समझ नहीं पाया,
उन नाज़ुक भावों तक पहुँच नहीं पाया।
दिल की तड़प बाकी रहने दे तुझमें,
तेरे बिना तेरा ही एहसास रहने दे मुझमें।

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