हर बात पर क्यों निकल आते हैं आँसू,
बात बेबात पर क्यों रुलाते हैं आँसू।
ज़ख़्म तो पुराने हैं, भर भी नहीं पाते,
तुम याद दिलाओ तो छलक जाते हैं आँसू।
लब ख़ामोश हैं, पर दिल पुकार उठता है,
हर नाम के पीछे तेरा चेहरा लाते हैं आँसू।
भुलाने की कोशिश में सौ दफ़ा टूटा हूँ,
पर तेरे ख़यालों से टकरा जाते हैं आँसू।
लोग कहते हैं — वक़्त बदल देता है सब कुछ,
मगर उस वक़्त में भी तेरे निशां लाते हैं आँसू।
ख़ुशी में भी तेरा एहसास सताता है मुझको,
हँसते हुए भी पलकों पे ठहर जाते हैं आँसू।
हेमंत अब क्या लिखे अपनी तन्हाई का फ़साना,
हर शेर में तेरी झलक दिखा जाते हैं आँसू।
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