Monday, 9 March 2026

जहाँ तक का साथ

ज़िंदगी एक लंबा सफर है।
इस सफर में मंज़िल से ज़्यादा मायने रखता है — साथ।
कुछ लोग थोड़ी दूर तक साथ चलते हैं,
कुछ पूरी उम्र तक,
और कुछ बस यादों में रह जाने के लिए मिलते हैं।
मगर जो भी पल किसी अपने के साथ जी लिए जाएँ,
वही बाद में जीवन की सबसे कीमती यादें बन जाते हैं।
इन्हीं पलों और इसी साथ की अहमियत को समर्पित ये पंक्तियाँ…

जहाँ तक का साथ है वहाँ तक तो चले चलो,
राह में मुश्किलें बहुत हैं — किसी को तो साथ ले चलो।
कौन जाने किस मोड़ पर राहें बदल जाएँ,
आज जो साथ है कल वो बिछड़ जाए ।

मंज़िल मिले न मिले ये किस्मत की बात है,
सफर के हसीन लम्हे साथ में जीते चलो।
शिकायतें बहुत मिलेंगी इस दुनिया की राह में,
पर दिलों में प्यार का दिया रोशन किए चले चलो।

याद रखना — नहीं भुला पाओगे साथ वाले पल,
कल कभी नहीं आएँगे आज जैसे ये पल।
तन्हा सफर तो कट जाएगा किसी तरह मगर,
जी न पाए तो फिर लौटकर नहीं आएगा ये पल।

वक़्त की रफ़्तार सब कुछ बदल देती है,
अपना ही जीवन कभी मुश्किल कर देती है।
बस इन्हीं पलों के लिए किसी को साथ लिए चलो,
एक-दूजे की हिम्मत बनो और साथ दिए चलो।

हँसी की वो बातें, बेवजह के वो सिलसिले,
दिल में कहीं चुपके से घर बना जाते हैं।
जब तन्हाई में कभी यादों की हवा चलती है,
यही पल आँखों में नमी बनकर आ जाते हैं।

इसलिए जो आज है उसे दिल से जी लो,
मुस्कुराहटों की हवा को यूँ ही बहने दो।
कल की चिंता में आज को मत खो देना,
इस पल को ही जी लो — इसे जी भर के जी लो।

कौन कब बिछड़ जाए ये वक़्त ही तय करता है,
हर रिश्ता अपनी उम्र लेकर ही चलता है।
इसलिए जो साथ है उसे दिल से निभा लो,
कल सिर्फ यादें ही रहेंगी — आज को जी भर के जी लो।


सफर में मंज़िल से ज़्यादा कीमती साथ होता है,
क्योंकि मंज़िल मिल भी जाए —
पर साथ देने वाले दोबारा नहीं मिलते। ✨

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