Monday, 9 March 2026

तेरी कमी

“तेरी कमी तुझसे ही पूरी होगी,
किसी और का मैं क्या करूँगा।
जो खालीपन तेरे नाम से भरा है,
उसे किसी और से कैसे भरूँगा।

अगर मेरे मर्ज़ का इलाज तू है,
तो फिर दवा का मैं क्या करूँगा।
तेरी एक मुस्कान ही काफ़ी है मुझे,
हर दर्द से मैं यूँ ही लड़ लूँगा।

अगर तू साथ नहीं, वही सबसे बड़ी बेचैनी है,
तेरे बिना सुकून में रहकर मैं क्या करूँगा।
तेरी बाहों की जो आदत लग चुकी है,
उस आदत से खुद को कैसे दूर रखूँगा।

अगर तेरी मौजूदगी मेरी फ़ितरत बन गई है,
तो तेरे बिना मैं कैसे रहूँगा।
जिस दिल ने धड़कना तुझसे सीखा है,
उसे किसी और के हवाले कैसे करूँगा।

मेरा सवाल भी तू, और जवाब भी तू ही है,
तेरे सिवा मैं किससे क्या पूछूँगा।
अगर तेरे साथ मैं खुश नहीं,
तो दुनिया के सामने मुस्कुराकर क्या करूँगा।”

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